कानपुर, 31 मार्च 2026 : कानपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी में आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा तथा उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
रविवार को कल्याणपुर, रावतपुर और पनकी क्षेत्र के तीन अस्पतालों प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की गई। पुलिस के अनुसार, गिरोह टेलीग्राम ग्रुप के जरिए गरीब युवकों को किडनी डोनर बनाने और जरूरतमंद मरीजों को फंसाने का काम करता था।
8 मार्च को दक्षिण अफ्रीका की एक महिला अरेबिका का अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कानपुर में ही किया गया था।
उसी दिन नोएडा के एक नामी स्कूल संचालक की पत्नी पारुल तोमर (मेरठ निवासी) का ट्रांसप्लांट हुआ। पारुल पिछले 8 साल से डायलिसिस पर थीं। डॉ. अफजल नामक व्यक्ति ने उन्हें मेरठ में डायलिसिस के दौरान टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा।
किडनी देने वाला युवक आयुष बिहार का रहने वाला है और उत्तराखंड में BA (4th सेमेस्टर) की पढ़ाई कर रहा था। दलाल शिवम अग्रवाल (उर्फ शिवम काना) ने उसे फंसाया। पुलिस जांच में पता चला कि डोनर को 9-10 लाख रुपये का वादा किया गया, जबकि मरीज से 60 लाख रुपये तक वसूल गए
गिरोह में अन्य गिरफ्तार आरोपी शामिल हैं: दलाल शिवम अग्रवाल, अस्पताल से जुड़े कर्मचारी राघव त्रिपाठी आदि। कुछ डॉक्टर फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है। लखनऊ से सर्जरी टीम बुलाई जाती थी और आहूजा हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर का इस्तेमाल होता था।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शहर में अब तक 50 से ज्यादा ऐसे अवैध ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। यह रैकेट बिहार, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर और विदेशों तक फैला हुआ था। सोशल मीडिया और टेलीग्राम के जरिए मरीजों व डोनरों की तलाश की जाती थी।
यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर मिलीभगत और मानव अंग तस्करी की ओर इशारा करता है। पुलिस आगे की जांच कर रही है और कई बड़े नाम सामने आने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है

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