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संसद का मानसून सत्र समाप्त, लोकसभा की उत्पादकता महज 19 फीसदी रही - INA NEWS

नई दिल्ली : संसद का 19 दिन लंबा मानसून सत्र गुरुवार को समाप्त हो गया। सत्र के दौरान दोनों सदनों में लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। सत्र के समापन के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सत्र की समीक्षा पेश की।

रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा की कुल उत्पादकता 39 फीसदी रही, जबकि लोकसभा की उत्पादकता सिर्फ 19 फीसदी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में विपक्षी दलों के सांसद अक्सर हंगामा करते थे और कई बार सदन से बाहर भी चले जाते थे। इसके बावजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के ज्यादातर दलों के सांसद और कुछ विपक्षी दलों के सांसद बहस व चर्चा में शामिल हुए।

लोकसभा में 12 विधेयक पारित, सिर्फ एक पर पूरी चर्चा
रिजिजू ने बताया कि लोकसभा में इस सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित किए गए। इनमें से सिर्फ एक विधेयक पर पूरी तरह चर्चा हो सकी। यह विधेयक ‘लोक परीक्षा  संशोधन विधेयक, 2026’ था। राज्यसभा में सभी विधेयकों पर चर्चा हुई।

यह संशोधन विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित तरीकों को रोकने से जुड़ा है। इसका मकसद पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को और सख्त करना है। यह 2024 के मौजूदा कानून में संशोधन करता है। संसद ने जुलाई के आखिर में इस विधेयक को मंजूरी दी थी।

विपक्ष पर रिजिजू का निशाना
रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अपने संसदीय अनुभव में उन्होंने पहली बार विपक्ष को चर्चा से बचते हुए देखा। उनका आरोप था कि सरकार अहम मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन लगातार हंगामे के कारण सदन का काफी समय बर्बाद हुआ।

उन्होंने कहा कि सरकार सत्र को दो नजरियों से देखती है। विधायी कामकाज के लिहाज से 12 विधेयकों का पारित होना उपलब्धि है। लेकिन बहस और चर्चा के लिए उपलब्ध समय का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं हो सका।

पेपर लीक कानून में सख्त प्रावधान
रिजिजू ने बताया कि लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 में परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के खिलाफ सजा को और सख्त किया गया है। इसमें कुछ अपराधों के लिए न्यूनतम पांच साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक की सजा और अधिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में पेपर लीक, प्रश्नपत्रों को अवैध तरीके से हासिल करने और उन्हें बेचने-खरीदने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। ऐसी गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कानून को और मजबूत किया गया है।

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