मेरठ: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की पुष्टि हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयान के बाद दोनों पार्टियों के रणनीतिकार टिकट बंटवारे पर मंथन में जुट गए हैं। मेरठ जिले की सात विधानसभा सीटों में से पांच या छह सीटें सपा और एक या दो सीटें कांग्रेस को दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अखिलेश यादव ने अमर उजाला संवाद में कहा था कि विपक्षी एकजुटता में सीटों से ज्यादा जीत उनका मुख्य फॉर्मूला है। इस एलान के बाद मेरठ सहित पश्चिमी यूपी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
मेरठ जिले में सीट बंटवारे का अनुमान
रणनीतिकारों के मुताबिक मेरठ जिले की सात सीटों का समीकरण इस प्रकार हो सकता है:
मेरठ शहर: सपा के लिए सबसे अनुकूल सीट। मुस्लिम और दलित वोटरों की अच्छी संख्या के कारण यह परंपरागत रूप से सपा के खाते में रहने की उम्मीद।
मेरठ कैंट: भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां सवर्ण, पंजाबी और मध्यमवर्गीय मतदाताओं की बहुलता है। कांग्रेस इस सीट पर मजबूत दावेदारी कर सकती है।
मेरठ दक्षिण: मुस्लिम, दलित, त्यागी और गुर्जर निर्णायक। पीडीए फॉर्मूले को लागू करने के लिए सपा की मजबूत दावेदारी।
सरधना: ठाकुर, मुस्लिम और गुर्जर बहुल हॉट सीट। मौजूदा समय में सपा विधायक हैं और पार्टी का दबदबा बना हुआ है।
हस्तिनापुर: अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित। सूबे की राजनीति में ऐतिहासिक महत्व वाली सीट।
किठौर: मुस्लिम, त्यागी और गुर्जर मतदाता निर्णायक। पूरी तरह सपा के पाले में मानी जा रही है।
सपा के प्रमुख चुनावी मुद्दे :
समाजवादी पार्टी इस बार इन मुद्दों को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाने की तैयारी कर रही है:
- पेपर लीक और युवाओं का भविष्य - मेरठ व आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा रोजगार और निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे हैं।
- किसानों की समस्याएं - गन्ना किसानों का मुद्दा हमेशा की तरह अहम रहेगा। खाद-बीज के बढ़ते दाम, छुट्टा पशुओं से फसल नुकसान और गन्ना मिलों में भुगतान की देरी पर सपा हमलावर रहेगी।
- सराफ, बुनकर और छोटे व्यापारी - बिजली दरों में वृद्धि और व्यापारिक सुविधाओं की कमी से नाराज व्यापारी वर्ग को साधने की कोशिश।
- पीडीए बनाम महंगाई - पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को महंगाई के खिलाफ एकजुट करने का फॉर्मूला।
सपा सूत्रों के अनुसार, गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के लिए सीट बंटवारा जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। मेरठ में इस बार चुनावी मुद्दे बेहद जमीनी और तीखे होने वाले हैं।

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