कानपुर : आईटीबीपी की 32वीं वाहनी में तैनात जवान ने अस्पताल की कथित लापरवाही में अपनी मां का हाथ कटने के बाद मंगलवार दोपहर आइस बॉक्स में कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर इंसाफ की गुहार लगाई। इस घटना से पूरे पुलिस कार्यालय में सनसनी फैल गई।
जवान विकास सिंह फतेहपुर जिले के खागा तहसील अंतर्गत हथगांव के महाराजपुर स्थित आईटीबीपी 32वीं वाहनी में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि 13 मई को उनकी मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में तकलीफ हुई। उन्हें पहले आईटीबीपी अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया।
जवान एंबुलेंस से मां को सिंहपुर स्थित पारस हॉस्पिटल ले जा रहे थे, लेकिन टाटमिल चौराहे पर जाम लगने के कारण उन्हें बीच में कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। मां को आईसीयू में रखा गया।
14 मई को हाथ में सूजन
विकास सिंह ने बताया कि 14 मई को जब वह मां से मिलने पहुंचे तो उनके दाहिने हाथ में सूजन दिखी। डॉक्टरों और स्टाफ को बताया तो हाथ में लगा विगो (IV लाइन) हटा दिया गया। उन्हें आश्वासन दिया गया कि सूजन धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी। लेकिन शाम तक मां का हाथ काला पड़ने लगा और सूजन बढ़ गई।
हालत बिगड़ने पर मां को कोठारी चौराहे के पास स्थित पारस हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। वहां डॉक्टरों ने हाथ में संक्रमण फैलने की पुष्टि की। 17 मई को संक्रमण इतना बढ़ गया कि डॉक्टरों को मां की जान बचाने के लिए उनका दाहिना हाथ काटना पड़ा।
पुलिस में शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
विकास सिंह ने कृष्णा हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए रेलबाजार थाने में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 18 मई को उन्होंने एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह से मुलाकात की, जिन्होंने सीएमओ को पत्र लिखने की बात कही। इसके बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। मंगलवार को जवान रोते हुए आइस बॉक्स में मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से इंसाफ की अपील की।
सीपी ने लिया संज्ञान
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पूरा मामला सुनने के बाद सीएमओ को जांच के आदेश देते हुए पत्र भेज दिया है। मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

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