लखनऊ, 4 अप्रैल 2026 - उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विभिन्न टोल प्लाजाओं पर ओवरलोडेड वाहनों को फर्जी नंबर प्लेटों से टोल पार कराने का बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में कई वाहन नंबर पूरी तरह अस्तित्वहीन पाए गए हैं, जिनका कहीं कोई रिकॉर्ड या चेसिस नंबर तक नहीं मिला। टोल कर्मचारियों की मिलीभगत और मैनुअल भुगतान के जरिए यह फर्जीवाड़ा रचा जा रहा था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा इटैांजा टोल प्लाजा का है। जनवरी महीने में यहां से गुजरने वाले 1600 ओवरलोडेड वाहनों में से करीब 900 वाहनों के टोल फर्जी नंबरों से काटे गए। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने जब एनएचएआई की सूची की पड़ताल की, तो उनके होश उड़ गए। ऐसे नंबर थे जिनका न तो कोई वाहन मालिक मिला, न चेसिस नंबर और न ही कोई अन्य विवरण। फरवरी महीने में भी अब तक 200 से अधिक फर्जी नंबर सामने आए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर ओवरलोडिंग पर सख्ती बरतने के लिए परिवहन विभाग, एनएचएआई और ट्रैफिक पुलिस को सतर्क किया गया था। इसके तहत एनएचएआई ने टोल प्लाजाओं से गुजरने वाले ओवरलोड वाहनों की सूची परिवहन विभाग को सौंपी। जब चार अधिकारियों की टीम ने इनकी जांच शुरू की, तो फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, यह कोई एक टोल प्लाजा तक सीमित नहीं है। लखनऊ के लगभग सभी प्रमुख टोल प्लाजाओं (इटैांजा सहित अन्य) पर ऐसी ही स्थिति है। ओवरलोड वाहन मालिक टोल कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी नंबरों पर टोल पर्ची कटवा रहे थे, जिससे ओवरलोडिंग की कार्रवाई से बच रहे थे।
फर्जी नंबरों पर टोल कटने के बावजूद वाहनों का कोई अस्तित्व नहीं मिला।
मैनुअल एंट्री के जरिए टोल सिस्टम में फर्जीवाड़ा किया जा रहा था।
टोलकर्मी और वाहन स्वामियों के बीच सांठगांठ के सबूत मिले हैं।
नवाबगंज टोल प्लाजा पर भी इसी तरह के मामलों में एआरटीओ टीम ने ट्रक रोके और फर्जी नंबरों का खुलासा किया।
यह घोटाला न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सड़कों पर ओवरलोड वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा रहा है। परिवहन विभाग अब सभी टोल प्लाजाओं पर सख्त निगरानी बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है “जांच जारी है। फर्जी नंबरों के पीछे कौन-कौन शामिल है, इसकी पूरी तह तक पहुंचा जाएगा। टोल सिस्टम में मैनुअल एंट्री पर भी रोक लगाई जाएगी।”
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