केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लंबे समय से फरार चल रहे एक बड़े आरोपी को आखिरकार दबोच लिया है। एलआईसी लखनऊ में हुए 6.37 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले के मुख्य आरोपी समीर जोशी को 31 मार्च 2026 को लखनऊ के एक मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
यह घोटाला फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच का है। शिकायत 13 अगस्त 2012 को एलआईसी लखनऊ से मिली थी। आरोपियों ने फर्जी पॉलिसी धारकों के नाम पर नकली चेक बनाकर एलआईसी के फंड का दुरुपयोग किया और खातों में हेराफेरी की।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि समीर जोशी ने एलआईसी के तत्कालीन उच्च श्रेणी सहायक पंकज सक्सेना के साथ सांठगांठ कर अपनी पत्नी अंजू जोशी और कर्मचारी जितेंद्र कुमार के नाम पर लगभग 62 लाख रुपये के फर्जी चेक तैयार किए और राशि गबन कर ली। कुल मिलाकर इस साजिश में 6.37 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी हुई।
21 अगस्त 2014 को सीबीआई ने समीर जोशी सहित 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
समीर जोशी को पहले जमानत मिल गई थी, लेकिन वह जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर फरार हो गया। 24 दिसंबर 2025 को अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।
लगभग 11 साल पुराने इस मामले में सीबीआई की टीम लगातार तलाश में थी। आखिरकार 31 मार्च 2026 को लखनऊ मेट्रो स्टेशन पर छापेमारी के दौरान उसे पकड़ लिया गया।
सीबीआई ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आगे की जांच जारी है।
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