उत्तर प्रदेश की आस्था, संस्कृति और पर्यटन मिलकर प्रदेश के विकास को नई दिशा दे रहे हैं। योगी सरकार के नौ वर्षों में ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से ‘टेंपल इकोनॉमी’ तक का यह बदलाव यूपी के नये स्वरूप और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को साफ दर्शाता है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित प्रेसवार्ता में यह बात कही। उन्होंने बताया कि बेहतर कानून व्यवस्था की वजह से वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जिनमें 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे। घरेलू पर्यटन में यूपी अब देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
मंत्री ने कहा, 2017 के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार हुआ है, जिसने पर्यटन को नई उड़ान दी है। राम मंदिर की स्थापना के बाद अयोध्या में वर्ष 2025 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं का आवागमन रहा। अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज इन तीनों प्रमुख धार्मिक स्थलों ने मिलकर लगभग 116 करोड़ पर्यटकों को आकर्षित किया।
जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव, देव दीपावली और ब्रज के रंगोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजन अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं। अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान 26 लाख से अधिक दीये जलाए गए, जो विश्व रिकॉर्ड है। इन आयोजनों से स्थानीय कारीगरी, होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारों को भारी बढ़ावा मिल रहा है।
मंत्री ने कहा कि पर्यटन नीति-2022 के तहत 36,681 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 5 लाख रोजगार पैदा होने की संभावना है। 1,757 पर्यटन इकाइयां पंजीकृत हो चुकी हैं। इसके अलावा 234 गांवों को ग्रामीण पर्यटन से जोड़ा गया है और 2026-27 तक 50,000 होमस्टे कमरे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
लखनऊ को वर्ष 2025 में UNESCO Creative City of Gastronomy का दर्जा मिलना भी यूपी के वैश्विक पर्यटन आकर्षण को बढ़ावा देने वाला कदम है।
जयवीर सिंह ने जोर देकर कहा कि पर्यटन अब यूपी की अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक बन चुका है। आस्था और विरासत को केंद्र में रखकर किए गए विकास कार्यों से न केवल पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हुई

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