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गरीबों के साथ उधमियों का भी ध्यान रखे सरकार : उधमी उमेश नेमानी

बरेली - विश्व भर मे दहशत और अनिश्चितता का माहौल पैदा करने के बाद देश मे भी कोरोना का कहर बदस्तूर जारी है।दिन-प्रतिदिन संक्रमितों और मृत्यु की संख्या मे लगातार इज़ाफ़ा होने से लोगों  मे भय और आशंकाओं का दौर जारी है।कोरोना के इस बदनुमा और बेचैनी भरे काल को खत्म करने के लिए केन्द्र से लेकर सभी राज्यों की सरकार अथक प्रयासो मे जुटी हुई हैं।

प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री इस आपदा से जंग मे युध्दस्तर पर किसी सेनापति की भांति मोर्चा संभाले हुऐ इस संकट भरे समय से टक्कर ले रहे हैं।संपूर्ण देश घरों मे कैद होकर रह गया है।सड़के सूनसान हैं, बाज़ार वीरान हैं, हर तरफ खामोशियों का सन्नाटा पसरा हुआ है।हमेशा गुलज़ार रहने वाले मार्केट,सैलानियों से सराबोर पर्यटन स्थल सूनसान पड़े हैं।उधोग-कारोबार बंद होने के साथ साथ खेत-खलिहान, दैनिक मजदूरी,रेहड़ी-पटरी बंद होने से रोज़ कुंआ खोदकर पानी पीने बाला गरीब तबका  बेहद ही विपरीत परिस्थितियों मे जीने को अभिशप्त है।अलबत्ता देश-प्रदेशों के हुक्मरानों के साथ समाजसेवी संस्थाओं और सामाजिक, राजनैतिक संगठनों द्वारा भी देश के निचले तबके की मदद का सिलसिला जारी है।

केन्द्र सरकार ने तो रोज़ कमाने-खाने बाले इस तबके के लिए 1.70 लाख करोड़ के एक बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा तक की है और इसका लाभ भी लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित इस तबके को दिलाने को ऐक्शन मे भी दिखाई दे रही है।लेकिन इस बुरे वक्त मे एक और तबका भी है जो इस संकटकाल मे अपने आपको असहाय और लाचार समझ रहा है तथा जिसकी ओर से  सरकारें विमुख दिखाई पड़ती हैं।यह तबका देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, यह देश मे रोज़गार सृजन कर उसकी अर्थव्यवस्था को टॉनिक देकर एक नई ताकत प्रदान करता है।वो तबका है एमएसएमई उधोग।

कहने को तो यह तबका मध्य एवं लघु उधोग पर आधारित है लेकिन देश -प्रदेश की इकोनॉमी मे यह बेहद महती भूमिका का निर्वहन करता है।कोरोना के कारण इस वर्ग पर भी अनिश्चितता और संकट के घने बादल मंडरा रहे हैं।अगर उथल-पुथल और बंदी का यह दौर लंबा चला तो सूक्ष्म, लघु व मध्य उधोग भी बर्बादी के रास्ते पर पहुंच जायेगा।सरकार ने फैक्ट्री मालिकों से अपने कर्मचारियों व मेहनतकश लोगों को कारखाने बंद के दौरान का वेतन देने के कड़े निर्देश दे रखें हैं।अधिकांश फैक्ट्री मालिकों व उधमियों का दावा है कि वे संकट के इस दौर मे सरकार के निर्देश पर बखूबी अमल भी कर रहे हैं।लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि यदि ये दौर लंबा खिंचा तो पहले से ही तालाबंदी की मार झेल एमएसएमई उधोग  अपने कर्मचारियों को वेतन कैसे दे पायेगा।

इन्हीं सब आशंकाओं-कुशंकाओ पर बरेली के बड़े उधमी और पशुपति ऐग्रो प्लाईवुड ग्रुप के सीएमडी उमेश नेमानी भी चिंतित दिखाई देते हैं।हालांकि वैश्विक महामारी से उत्पन्न हुऐ संकट के इस दौर मे वो  पहले इससे उबरने के सरकार के कदमों का समर्थन करने की बात कहते हैं।उधमी उमेश नेमानी का स्पष्ट मानना है कि पहले हम सब को मिलकर देश पर आई इस वैश्विक मुसीबत से निबटना है।लेकिन उनका यह भी कहना है कि जिन इलाकों व शहरों मे यह जानलेवा वायरस नहीं पहुंचा है, वहां पर अंतर्जनपदीय सीमाओं को सील कर पूरे शहर व इलाके को सेनेटाईज़ कर तालाबंदी मे ढील दे देनी चाहिए तथा जो क्षेत्र इस महामारी से ग्रसित हैं वहां संपूर्ण सीलिंग होना बेहतर साबित होगा।

कर्मचारियों के वेतन के प्रश्न पर वे कहते हैं कि उन्होंने अपने कर्मचारियों का मार्च व अप्रैल का वेतन दे दिया है और आगे भी सरकार के निर्देशानुसार देंगे।हालांकि वे उधमियों के लिए सरकार से कयी रियायतों व प्रोत्साहन पैकेज की अपेक्षा भी रखे हुऐ हैं।जिसमें बंद पड़े कारखानों के बिजली के बिल के मिनिमम चार्ज सहित अन्य खर्च भी हैं।उनका साफ कहना है कि जब कारखाने-मशीनें बंद है तो फिर बिल किस बात का।इसके अलावा उधमी उमेश नेमानी इस विपरीत परिस्थिति मे रोज़गार से महरूम हुऐ गरीबों,कामगारों व रोज़ कमाने खाने बालो को राशन ,भोजन आदि भी मुहैया करा कर मददगार बने हुये हैं।

INA NEWS DESK 

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