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22 साल बाद पाकिस्तान ने फिर शुरू की लाहौर-वाघा शटल ट्रेन सेवा

नई दिल्ली - पाकिस्तान ने अब 22 साल के बाद फिर से लाहौर-वाघा शटल ट्रेन सेवा का संचालन फिर से शुरू कर दिया है। इस ट्रेन के शुरू हो जाने के बाद अब लाहौर से वाघा बार्डर तक जाने वाले यात्रियों को समय कम लगेगा। वो जल्दी बाघा बार्डर पहुंच जाएंगे।

दरअसल वाघा बार्डर पर रोजाना होने वाले भारत-पाक सैनिकों की परेड को देखने के लिए काफी संख्या में लोग जाते हैं। अभी तक उनको बस से वहां तक जाना पड़ता है, ऐसे में समय अधिक लगता है। 22 साल पहले इसी तरह से लाहौर से एक पैसेंजर ट्रेन रोजाना वाघा बार्डर तक आती थी मगर किन्हीं कारणों से ये बंद कर दी गई मगर अब उसे फिर से शुरु कर दिया गया है।

एक घंटे का लगेगा समय, प्रतिदिन तीन चक्कर 

जालो और अन्य स्थानीय स्टेशनों पर ठहराव देख कर ट्रेन को वाघा रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में एक घंटा लगेगा। यह ट्रेन रोजाना तीन चक्कर लगाएही और 1,000 यात्रियों को सुविधा प्रदान करेगी। इसके लिए यात्रियों को 30 रुपये प्रति व्यक्ति किराया देना होगा। 


7 से होनी थी शुरु, एक सप्ताह हुई लेट 

वैसे इस ट्रेन का संचालन 7 दिसंबर से होना था मगर किन्हीं कारणों से ये उस दिन नहीं शुरू हो पाई। अब 14 दिसंबर को इसका संचालन शुरू हो पाया। रेलमंत्री शेख रशीद ने इस ट्रेन का औपचारिक उद्घाटन किया। अभी भी काफी संख्या में लोग वाघा बार्डर पर जलो पार्क और वाघा बार्डर पर होने वाले झंडारोहण को देखने के लिए जाते हैं। शेख रशीद का कहना है कि वो रेल मार्गों के माध्यम से अपने उपनगरों के साथ लाहौर महानगरीय शहर का कनेक्शन शुरू करना चाहते हैं। लाहौर-वाघा बार्डर इसमें पहला कदम है जिसके बाद अगले 15 दिनों के भीतर लाहौर से रायविंड के लिए एक और ट्रेन होगी।


जनवरी में, लाहौर-गुजरांवाला ट्रेन का शुभारंभ 

उन्होंने बताया कि साल 2020 में लाहौर-गुजरांवाला ट्रेन का शुभारंभ किया जाएगा। प्रधानमंत्री इमरान खान से इसका उद्घाटन करवाया जाएगा। देश के तमाम अन्य हिस्सों को जोड़ने के लिए भी रणनीति बनाई जा रही है। जल्द ही इस दिशा में भी काम शुरू किया जाएगा। जिससे शहर के लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में अधिक समय न लगाना पड़े। 


तीन डिब्बों का कराया नवीनीकरण 

पाकिस्तान रेलवे ने वाघा बार्डर तक ट्रेन चलाने के लिए तीन यात्री डिब्बों का नवीनीकरण कराया है, इसमें ट्रेन के बाहरी डिब्बे पर मीनार-ए-पाकिस्तान की बाहरी तस्वीरें, वाघा सीमा पर रेंजर्स परेड आदि शामिल हैं। शटल ट्रेनों को चलाने के पीछे मुख्य उद्देश्य राजस्व अर्जित करना नहीं था, बल्कि दैनिक आधार पर कई लोगों को परेशानी मुक्त यात्रा प्रदान करना था।

INA NEWS DESK

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