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मोदी की कूटनीतिक सक्रियता ने लगाए शिखर सम्मेलन में चार चांद

  • समूह-20 बैठक में पीएम मोदी की कूटनीतिक सक्रियता ने लगाए शिखर सम्मेलन में चार चांद


NEW DELHI INA DESK - विदेश दौरे पर समय का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को पहले से ही काफी जाना जाता है, लेकिन समूह-20 (जी-ट्वेंटी) देशों की बैठक के दौरान उन्होंने अर्जेटीना में जो सक्रियता दिखाई है वह एक रिकार्ड से कम नहीं है।

राजधानी ब्यूनस आयर्स पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद एक अंतरराष्ट्रीय योग कार्यक्रम में हिस्सा ले कर मोदी ने जो कूटनीतिक सिलसिला शुरु किया वह उनकी वहां से रवानगी के कुछ मिनट पहले तक चला है। इस दौरान मोदी ने जी-ट्वेंटी देशों की कई बैठकों में हिस्सा लेने के अलावा 11 देशों के राष्ट्राध्यक्षों से आधिकारिक मुलाकातों के अलावा ब्रिक्स देशों, जापान-भारत-अमेरिका (जय) देशों के संगठन और रूस-भारत-चीन (आरआइसी) जैसे संगठनों की शिखर वार्ता में हिस्सा लिया।

दक्षिण अमेरिका से लेकर जापान, यूरोप से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक में भारतीय कूटनीति की समीक्षा
पीएम मोदी ने अपनी यात्रा के अंतिम दिन आठ देशों के सरकारों के प्रमुखों से द्विपक्षीय वार्ता की है। इन सभी देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता का चुनाव विदेश मंत्रालय ने भारत की कूटनीतिक नफा-नुकसान को देखते हुए किया था। हर मुलाकात का अलग से एजेंडा तैयार था जिसमें द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा के साथ ही भविष्य के लक्ष्यों का साफ तौर पर उल्लेख था। 

पीएम मोदी ने इन मुलाकातों के जरिए दक्षिण अमेरिका से लेकर जापान तक और यूरोप से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक में भारत की कूटनीतिक हितों की एक तरह से समीक्षा की है।

मोदी का कार्यक्रम वापसी के कुछ मिनट पूर्व तक जारी रहा

अपने प्रवास के अंतिम दिन की शुरुआत पीएम ने अर्जेटीना के राष्ट्रपति मौरिसियो मारसी के आधिकारिक निवास पर नाश्ते के साथ किया। मारसी और मोदी के बीच रक्षा व ईनर्जी क्षेत्र में सहयोग पर सबसे ज्यादा बात हुई। भारत अर्जेटीना को आण्विक ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग देने को तैयार है जबकि रक्षा क्षेत्र में भी भारतीय रक्षा उद्योग के लिए वहां काफी संभावनाएं दिख रही हैं। इसके बाद यूरोपीय संघ के अध्यक्ष जीन क्लाउडे जंकर और यूरोपीय संघ के प्रेसिडेंट डोनाल्ड टस्क के साथ भारत व ईयू के बीच तमाम मुद्दों पर बात हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के ट्विट के मुताबिक आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का मुद्दा सबसे अहम रहा।

इसके बाद मोदी ने एक बाद एक जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरल रामाफोसा, नीदरलैंड के प्रेसिडेंट मार्क रूट, स्पेन के प्रेसिडेंट पेड्रो सांचेंज और जमैका के प्रेसिडेंट एंड्रू होलनेस के साथ मुलाकात हुई। इसके बाद मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां के साथ लंबी बैठक हुई। दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रणनीतिक रिश्तों को देखते हुए यह बैठक काफी अहम माना जा रहा है। इस बीच मोदी की फीफा के अध्यक्ष जियानी इनफांटिनो के साथ भी एक मुलाकात हुई। सनद रहे कि फीफा भारत को फुटबाल के विकास के तौर पर काफी संभावनाओं के साथ देख रहा है।

यह तो हुई सिर्फ एक दिन की बात, लेकिन इसके पहले अगर शनिवार की बात करें तो मोदी की कूटनीतिक सक्रियता का एक और अंदाजा हो जाएगा। उस दिन मोदी ने सबसे पहले ब्रिाजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्राध्यक्षों के साथ ब्रिक्स बैठक में हिस्सा लिया और इसके बाद उनकी चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय आधिकारिक मुलाकात हुई। इसके बाद समूह-20 देशों की बैठक की शुरुआत हुई।

दोपहर बाद रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग के साथ आरआईसी (रूस-भारत-चीन) की शिखर बैठक हुई और इसके बाद 'जय' यानी जापान, अमेरिका व भारत की शिखर बैठक हुई। इन दोनों बैठकों को संभवत: ब्यूनस आयर्स में मोदी की सबसे अहम बैठकों में से एक माना जा रहा है। इस बीच मोदी ने चिली के राष्ट्रपति सेब्सिटियन पिनेरा और सउदी अरब के प्रिंस सलमान अल सउद से भी द्विपक्षीय आधिकारिक मुलाकात की।

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