हमीरपुर : यमुना नदी किनारे बसे एक छोटे से मजरे की जिंदगी पूरी तरह नाव पर टिकी हुई है। करीब 800 आबादी वाले इस गांव में न तो पुल है और न ही कोई अन्य सुरक्षित व्यवस्था। ग्रामीणों को सब्जी की खेती, रोजगार और बच्चों की पढ़ाई के लिए रोजाना नाव से नदी पार करनी पड़ती है।
गांव में 10 से 25 नावें उपलब्ध हैं, जिनके सहारे किसान कानपुर देहात सीमा पार अपनी सब्जी की बारी में काम करते हैं। सुबह-सुबह छात्र-छात्राएं भी इसी नाव से स्कूल पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यमुना पार जाने के लिए नाव ही उनका एकमात्र सहारा है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
तीन साल पहले भी हुआ था हादसा
गांव निवासी अजय सिंह ने बताया कि तीन साल पहले इसी इलाके में नाव हादसा हो चुका है। उस समय सात लोग नदी में डूब गए थे, जिन्हें ग्रामीणों ने किसी तरह बचाया था। इसके बावजूद सुरक्षा के कोई स्थायी इंतजाम नहीं किए गए। नावों की स्थिति खराब है और न ही कोई जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के मौसम में नदी उफान पर रहती है, तब नाव से पार करना और भी खतरनाक हो जाता है। फिर भी मजबूरी में रोजाना सैकड़ों लोग इस जोखिम को उठाने को विवश हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि यमुना नदी पर पुल का निर्माण कराया जाए या फिर सुरक्षित नाव सेवा के साथ जीवन जैकेट जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।

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