मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र आज इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए। 91 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। जिंदादिल अंदाज और गहरी संवेदनाओं वाले शेर लिखने वाले बशीर बद्र की शायरी का जादू आज भी लाखों दिलों पर छाया हुआ है।
बशीर बद्र की कई गजलें और शेर बॉलीवुड फिल्मों में अमर हो चुके हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय गजल ‘न जी भर के देखा, न कुछ बात की…’ भी शामिल है।
बशीर बद्र का बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री मीना कुमारी से गहरा भावनात्मक और साहित्यिक संबंध रहा। मीना कुमारी (जिनका शायरी का उपनाम ‘नाज’ था) खुद एक अच्छी शायर थीं और बशीर बद्र की शायरी की बड़ी प्रशंसक थीं।
1960 के दशक में बशीर बद्र का एक शेर बेहद लोकप्रिय हुआ था:
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।”
मीना कुमारी को यह शेर इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे अपने हाथों से लिखकर एक प्रसिद्ध मैगजीन को प्रकाशित करने के लिए दे दिया। अपनी तन्हाई के पलों में मीना कुमारी अक्सर बशीर बद्र के शेर अपनी निजी डायरी में लिखा करती थीं।
बेटे नुसरत बद्र की बॉलीवुड उपलब्धि
बशीर बद्र सिनेमा से सिर्फ शायरी के जरिए ही नहीं, बल्कि परिवार के माध्यम से भी जुड़े रहे। उनके बेटे नुसरत बद्र एक मशहूर गीतकार हैं। उन्हें सबसे बड़ी सफलता संजय लीला भंसाली की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘देवदास’ से मिली,
जिसमें उन्होंने यादगार गीत लिखे:
डोला रे डोला
सिलसिला ये चाहत का
मार डाला
इन गीतों ने पूरे देश में धूम मचा दी थी।
बशीर बद्र की रूहानी शायरी और उनकी विरासत अब हमेशा याद की जाएगी। उनके असंख्य प्रशंसक सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
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