मेरठ से प्रयागराज तक के 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली शुरू होने के साथ ही टोल दरों में भारी उलटफेर देखने को मिला है। उद्घाटन के ठीक बाद तीन दिन में तीन बार दरें बदली गईं, जिससे यात्रियों में भ्रम फैल गया। यूपीडा अभी तक पूर्ण टोल संरचना को अंतिम रूप नहीं दे पाया है।
कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहनों के लिए ₹1,800 तय किया गया। दोपहिया, तीनपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए ₹905। यह दरें पूरे एक्सप्रेसवे की एकल यात्रा (पहले टोल प्लाजा से आखिरी तक) पर लागू बताई गईं।
बुधवार को बदलाव: दरें घटकर कार के लिए ₹1,514 रह गईं। यह दिसंबर 2025 के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर तय की गई थी। प्रति किलोमीटर दर ₹2.55 रखी गई, जिससे 594 किमी × 2.55 = लगभग ₹1,514 हो जाता है।
बृहस्पतिवार (30 अप्रैल) को नया बदलाव: फिर बढ़ोतरी कर कार/हल्के वाहनों के लिए ₹1,765 कर दिया गया। इसमें ₹1,365 अडानी इंटरप्राइजेज और ₹440 आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेंगे। ये बार-बार बदलाव यूपीडा की तैयारी में कमी या गणना में त्रुटि को दर्शाते हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में शुरुआत में ही ₹1,515 (लगभग ₹2.55 प्रति किमी) का अनुमान लगाया गया था, लेकिन उद्घाटन के बाद व्यावहारिक घोषणाएं अलग-अलग आईं।
वर्तमान स्थिति (1 मई 2026 तक):
कार,जीप,वैन,हल्के वाहन: ₹1,765 (एक तरफ की यात्रा)
दोपहिया, तीनपहिया, ट्रैक्टर: शुरू में ₹905 बताया गया, लेकिन नवीनतम कन्फर्मेशन के साथ यह भी प्रभावित हो सकता है।
अन्य वाहनों के लिए भी प्रति किमी आधारित दरें (जैसे 1.28, 4.05, 8.20 आदि) प्रस्तावित हैं, लेकिन कुल राशि में उतार-चढ़ाव जारी है।
टोल क्लोज्ड सिस्टम में लिया जाएगा , यानी एंट्री और एग्जिट पॉइंट के आधार पर तय दूरी का शुल्क से कटेगा। पूरा रूट तय करने पर ही अधिकतम टोल लगेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे का महत्व:
यह उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी आधारभूत परियोजना है, जो पश्चिमी (मेरठ) और पूर्वी (प्रयागराज) उत्तर प्रदेश को जोड़ती है। ₹36,230 करोड़ की लागत से बने इस 6-लेन (8 लेन तक विस्तार योग्य) एक्सप्रेसवे से यात्रा समय 11-13 घंटे से घटकर 6-7 घंटे रह जाएगा। अधिकतम गति 120 किमी/घंटा रखी गई है। अडानी ग्रुप ने लगभग 80% (464 किमी) और आईआरबी ने बाकी हिस्सा विकसित किया है।

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