कानपुर (18 अप्रैल 2026): उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। केंद्रीय विद्यालय अर्मापुर की 10वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा वैशाली सिंह ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल करने के बावजूद खुदकुशी कर ली। वैशाली को 95 प्रतिशत से ज्यादा अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन लक्ष्य से महज 3 प्रतिशत कम नंबर आने पर वह बुरी तरह टूट गई।
वैशाली पनकी क्षेत्र के रतनपुर शिवालिक भवन की निवासी थी। बुधवार को जब सीबीएसई 10वीं का रिजल्ट घोषित हुआ, तो वह मायूस हो गई। गुरुवार शाम को उसने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। फंदा लगाने से पहले वैशाली ने अपने कुछ साथियों को मोबाइल पर वॉयस रिकॉर्डिंग भेजी थी, जिसमें उसने कहा था:
“मुझसे अब जिया नहीं जाएगा.. मैं एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं..अब मुझे जीने की इच्छा नहीं है। मुझे बहुत डर लगता है.. मां मुझ पर इतना पैसा खर्च कर रही हैं.. कहीं उनका पैसा बर्बाद न हो जाए।”
इस वॉयस नोट में वैशाली ने अपनी हताशा और परिवार पर बोझ बनने का डर जाहिर किया था।
परिवार की स्थिति
वैशाली के पिता वीरेंद्र सिंह (जो प्राइवेट कर्मी थे) की दो साल पहले मौत हो चुकी है। मां काजल सिंह पनकी के एक मॉल में काम करके परिवार का पालन-पोषण करती हैं। 19 वर्षीय भाई प्रिंस कुछ साल पहले पढ़ाई छोड़ चुका है और घर पर रहता है।
घटना के दिन काजल मॉल में ड्यूटी पर थीं। दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक उन्होंने बेटी को कई बार कॉल किया, लेकिन फोन नहीं उठा। जब उन्होंने प्रिंस को कमरे में भेजा तो उसने बहन का शव फंदे पर लटका हुआ देखा और चीख पड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस की जांच
पनकी थाना इंस्पेक्टर मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि प्रारंभिक जांच में छात्रा के तनाव और हताशा के कारण खुदकुशी करने की बात सामने आई है। पुलिस ने वैशाली का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। तहरीर मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि स्कूल के शिक्षकों की टिप्पणियों और तानों (जैसे भाई को निठल्ला बताने संबंधी) ने वैशाली पर अतिरिक्त दबाव डाला था, जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना एक बार फिर शिक्षा प्रणाली में बढ़ते दबाव, अंक-केंद्रित प्रतिस्पर्धा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा की ओर इशारा करती है। 92 प्रतिशत जैसे शानदार अंक भी आजकल के माहौल में “कम” माने जा रहे हैं, जिसके चलते कई छात्र हताशा का शिकार हो रहे हैं।
परिवार और दोस्तों का कहना है कि वैशाली पढ़ाई में होशियार और मेहनती थी। उसकी मौत से पूरा इलाका सदमे में है।
नोट: आत्महत्या एक गंभीर समस्या है। यदि आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया मदद लें। भारत में हेल्पलाइन नंबर: 9152987821 या 104 (मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन) पर संपर्क करें।
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