मेरठ (उत्तर प्रदेश): सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश के बाद मेरठ के शास्त्रीनगर इलाके में अवैध सेटबैक (इमारतों के चारों ओर अनिवार्य खुली जगह पर किया गया निर्माण) को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। बुधवार को आवास एवं विकास परिषद ने कोर्ट के निर्देश पर सेंट्रल मार्केट की 44 व्यावसायिक संपत्तियों को सील कर दिया। वहीं, गुरुवार 9 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक को दो महीने के अंदर तोड़ने का आदेश दे दिया।
कोर्ट की सख्ती के बाद कई व्यापारियों ने भारी मन से खुद ही अपने अवैध निर्माण तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अलंकार साड़ी के संचालक राजीव गुप्ता ने बताया, “इस बाजार की नींव मेहनत और संघर्ष पर टिकी है। यहां बड़ी संख्या में पंजाबी समाज के दुकानदार हैं, जिनमें कई परिवार विभाजन के बाद पाकिस्तान से आकर बसे थे।”
उन्होंने कहा कि करीब 35-40 साल पहले जब शास्त्रीनगर जंगल जैसा इलाका था और शाम ढलते ही लोग यहां आने से कतराते थे, तब इन व्यापारियों ने तख्त और फोल्डिंग पलंग पर फड़ लगाकर काम शुरू किया। पाई-पाई जोड़कर उन्होंने एलआईजी (अल्प आय वर्ग) के भवन लिए और उनमें छोटी-छोटी दुकानें खोलीं। उनकी मेहनत ने ही इस सुनसान इलाके को आज शहर के पॉश बाजारों में शुमार कराया है।
व्यापारियों की आंखों में अपने उस संघर्ष को याद करते हुए आंसू आ जाते हैं। वे मौजूदा हालात के लिए सीधे तौर पर आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका तर्क है कि अधिकारियों की मिलीभगत और शह के बिना आवासीय क्षेत्र कभी बाजार में नहीं बदल सकता था।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अधिकारियों की लापरवाही पर भी नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण को किसी भी रूप में नियमित (कंपाउंडिंग) नहीं किया जा सकता। कोर्ट का कहना है कि कानून का राज सार्वजनिक दबाव से ऊपर है और जिंदगियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।
प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध कब्जे वाले सेटबैक को हटाने के लिए पहले 10-15 दिन का समय व्यापारियों को खुद तोड़ने के लिए दिया जाए, उसके बाद अधिकारी कार्रवाई करेंगे और खर्चा भी वसूल करेंगे।
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