कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद अब इस कांड की परतें खुलती जा रही हैं। मामले में मेरठ के अल्फा अस्पताल से जुड़े तीन डॉक्टरों के नाम सामने आने के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।
पुलिस के अनुसार, अल्फा अस्पताल से जुड़े डॉ. अफजल, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अमित कुमार और डॉ. वैभव मुदगल (दंत चिकित्सक) पर अवैध किडनी कारोबार में शामिल होने के आरोप हैं। इन तीनों को पुलिस तलाश रही है और लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी चल रही है।
जांच में पता चला कि डॉ. अफजल ने टेलीग्राम चैनल पर किडनी डोनर की तलाश में पोस्ट डाली थी। इसी के जरिए बिहार के बेगूसराय (समस्तीपुर) निवासी आयुष (23 वर्ष, एमबीए अंतिम वर्ष का छात्र, देहरादून के एक कॉलेज से पढ़ाई कर रहा था) को संपर्क किया गया। आयुष को मात्र साढ़े तीन लाख रुपये देकर उसकी किडनी निकाल ली गई।
29 मार्च को कानपुर के आहूजा अस्पताल में मुजफ्फरनगर के मोरना निवासी पारुल तोमर (मेरठ में स्कूल चलाने वाले परिवार की महिला) को दिल्ली से आए डॉक्टरों द्वारा आयुष की किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गई। पूरे सौदे में दलालों और गिरोह ने मोटी रकम कमाई, जबकि डोनर को बहुत कम पैसा दिया गया। विवाद होने पर मामला कल्याणपुर थाने पहुंचा और पुलिस ने रैकेट का भंडाफोड़ किया।
अल्फा अस्पताल पर पहले भी उपचार में लापरवाही के गंभीर आरोप लग चुके हैं। नवंबर 2025 में गाजियाबाद निवासी हरद्वारी लाल की शिकायत पर सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। हरद्वारी लाल का आरोप था कि उनके बेटे मुकेश कुमार को लकवे का इलाज कराने के बहाने उन्हें अल्फा अस्पताल में भर्ती कराया गया और 20-25 हजार के वादे पर 90 हजार रुपये वसूले गए। बाद में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट (एफआर) आने पर लाइसेंस बहाल कर दिया गया था।
अब किडनी रैकेट सामने आने के बाद अल्फा अस्पताल पर फिर से जांच शुरू हो गई है। सीएमओ ने अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अस्पताल का आधा स्टाफ भी फरार बताया जा रहा है।
पुलिस पूछताछ में आयुष ने बताया कि उसे ब्रेनवॉश कर पैसों का लालच दिया गया। वह परिवार को झूठ बोलकर कानपुर आया था। मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मेरठ, नोएडा और दिल्ली में भी छापेमारी जारी है।
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