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कोरोना के खिलाफ जंग : हिम्मत के आगे बौनी हो गई हर मुसीबत, बन गया मददगारों का कारवां

 फिल्म पटकथा लेखिका और उपन्यासकार अद्वैता काला का कहना है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद आज भी कम्युनिटी किचन के जरिये रोजाना 700-1500 लोगों को खाना उपलब्ध करवाया जा रहा है।

गुरुग्राम [आदित्य राज]। पिछले 4 महीने से भी अधिक समय से कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ देशभर में हर स्तर पर जंग जारी है। मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में लगे लॉकलाउन के चलते गरीब, असहाय और लाचार लोगों के सामने 2 जून की रोटी का संकट अब भी बना हुआ है। कोरोना वायरस संकट के दौरान तमाम समाजसेवी और अन्य संगठन गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं गुरुग्राम की रहने वालीं फिल्म पटकथा लेखिका और उपन्यासकार अद्वैता काला। विद्या बालन अभिनीत बॉलीवुड फिल्म 'कहानी' फेम अद्वैता काला लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही आस पास के इलाकों में सैकड़ों-हजारों की संख्या में निसहाय, बेसहारा और भीख मांग कर गुजर बसर करने वालों में भोजन का वितरण करवा रही हैं, ताकि किसी को भी भूख का सामना नहीं करना पड़े।

कम्युनिटी किचन बना लोगों का सहारा

लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही गरीब और असहाय लोगों के सामने 2 जून की रोटी की संकट खड़ा होने वाला है यह गुरुग्राम सेक्टर-56 में रहने वालीं लेखिका-उपन्यासकार अद्वैता काला ने भांप लिया था। इसी के मद्देनजर उन्होंने अपने 6 करीबियों (अंबिका, अर्जुन पांडेय, रचना, रसिका, संदीप, प्रभात अग्रवाल) की मदद से नाथूपुर इलाके में कम्युनिटी किचन की शुरुआती की। लॉकडाउन की शुरुआत से ही इस किचन की मदद से लोगों को भोजन मुहैया कराया जाने लगा।

अद्वैता काला की मानें तो अप्रैल के पहले हफ्ते से ही जरूरतमंद लोगों की संख्या में इजाफा होने लगा और 1500-2000 लोगों को रोजाना खाना दिया जाने लगा। यह संख्या रोजाना घटती-बढ़ती रही, लेकिन हम लोगों ने ठान लिया था, लेकिन हिम्मत के आगे हर मुसीबत बौनी होती गई।

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