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12 वर्षीय बच्ची के साथ हैवानियत करने वालों को फांसी की सजा

बरेली : बरेली के नवाबगंज थानाक्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हैवानियत की हदें पार करने वालों को शुक्रवार को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। 

चार साल पुरानी इस घटना पर अदालत के फैसले ने लोगों को एक बार फिर निर्भया कांड की याद दिला दी है। चार साल पहले नवाबगंज थानाक्षेत्र के एक खेत में पीड़ित बच्ची के बर्बरता करने के बाद दरिंदों ने उसकी हत्या कर अर्धनग्न अवस्था में छोड़ दिया था। गांव वालों को घटना का पता लगने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

जांच पड़ताल के दौरान मामले में कुछ ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए जिससे लोगों की रूह कांप गई। एफआईआर के मुताबिक बच्ची के नाजुक अंग पर लकड़ी से चोटें पहुंचाई गई थीं और वह दूर से ही लहूलुहान दिखाई दे रही थी। पोस्टमॉर्टम के दौरान बच्ची के नाजुक अंग से भी लकड़ी निकली थी। चार साल पुरानी न्याय की इस लड़ाई में बच्ची के परिवारवालों को भी कई तरह के उतार चढ़ाव सा सामना करना पड़ा।

आरोपियों को फांसी की सजा दिलाने का रास्ता साक्ष्यों के दम पर सरकारी वकीलों ने तैयार किया। एक समय के बाद बच्ची का परिवार केस की पैरवी लगभग छोड़ ही चुका था, मगर सरकारी वकीलों ने पुलिस की ओर से जुटाए साक्ष्यों का वैज्ञानिक अनुसंधान कराके उन्हें और मजबूत कर दिया। यही साक्ष्य सजा के लिए कोर्ट में बड़े आधार बन गए। हालांकि आरोपी पक्ष उच्च अदालत में अपील की बात कह रहा है, लेकिन पुलिस अफसर भी मजबूत पैरवी कर सजा बरकरार रखने का दम भर रहे हैं।

डीजीसी क्राइम सुनीति कुमार पाठक ने इस मुकदमे में हुई सजा के 41 पन्नों के फैसले की जानकारी देते हुए स्टाफ से लेकर कार्रवाई में सहयोग करने वाले सभी पुलिस अफसरों को साधुवाद दिया। उन्होंने इसे दिल्ली के निर्भया कांड से भी जघन्य अपराध करार दिया। कहा, दिल्ली दुष्कर्म कांड की पीड़िता बालिग थी, लेकिन यहां 12 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की हदें पार की गईं। पीड़ित बच्ची अनुसूचित जाति के गरीब परिवार से जुड़ी थी और आरोपी पिछड़ी जाति के प्रभावशाली परिवारों से ताल्लुक रखते थे। हालात ऐसे बन गए कि पीड़ित बच्ची के घरवालों ने पैरवी ही छोड़ दी। उन्हें तो शायद आज सजा होने की जानकारी भी नहीं रही होगी। 

पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस चाहे तो क्राइम कंट्रोल बड़ी बात नहीं है। इस मामले में पुलिस ने बिना प्रभावित हुए निष्पक्ष होकर पीड़ित के हक में अपना फर्ज निभाया।

एडीजीसी पॉक्सो कोर्ट रीतराम राजपूत ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के कपड़ों के साथ ही छिपाई गई पीड़ित की सलवार से नमूने लेकर लखनऊ लैब भेजे। बच्ची के नाजुक अंग में डाली गई सरसों की लकड़ी पर लगे पदार्थ से भी सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई। नाजुक अंग पर करीब दस चोटें पाई गईं और हाइमन भी टूटी मिली। इन तथ्यों ने घटना को गंभीरतम अपराध साबित किया। लगातार चार दिन चली बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया। उन्हें उम्मीद थी कि बच्ची के गुनहगारों को फांसी से कम सजा नहीं होगी।

INA NEWS DESK

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