नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि अगर 1947 में आरएसएस ज्यादा मजबूत होता, तो भारत का विभाजन नहीं होता। उन्होंने विभाजन को देश के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बताया।
आंबेकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “उस समय आरएसएस उतना सशक्त नहीं था जितना आज है। फिर भी संघ ने हिंदुओं की रक्षा करने और उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर भी दिया बयान
आरएसएस नेता ने हाल में चर्चा में आए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के उभार पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में सभी आवाजों और भावनाओं को समाहित करने की अपार क्षमता है।
आंबेकर ने जोर देकर कहा कि Gen Z (जेनरेशन Z) को देश के भविष्य पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, भारत लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करता है, पारदर्शी चुनाव कराता है और यहां मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र है, जिसमें सोशल मीडिया भी शामिल है।
मुख्य बातें:
- 1947 के विभाजन को देश के लिए सबसे दर्दनाक घटना बताया
- आरएसएस की उस समय की कमजोर स्थिति पर खेद जताया
- विभाजनकाल में हिंदुओं की रक्षा और पुनर्वास में संघ की भूमिका पर बल
- भारतीय लोकतंत्र की समावेशी क्षमता पर विश्वास
- युवा पीढ़ी (Gen Z) में देश के प्रति भरोसा
यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरएसएस अपनी शाखाओं के विस्तार और सामाजिक कार्यों के जरिए देशभर में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।

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