इंदौर, जो लगातार स्वच्छता में देश का नंबर वन शहर माना जाता है, इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। बढ़ती गर्मी और सूखते भूजल स्तर के कारण कई इलाकों में बोरिंग सूख गए हैं, जिससे नर्मदा जल पर निर्भरता बढ़ गई है। फिर भी नगर निगम की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही।
नयापुरा, भोई मोहल्ला, तिलक पथ और आसपास के मोहल्लों में हालात सबसे खराब हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नल एक दिन छोड़कर आते हैं और उसमें भी पहले 10 मिनट तक गंदा पानी निकलता है। जब तक एक-दो बाल्टी साफ पानी भर पाते हैं, नल बंद हो जाता है। ऐसे में कई परिवार या तो 30-40 रुपये में पानी की केन खरीदने को मजबूर हैं या फिर सुबह-सुबह बाइक, रिक्शा या बुलेट पर 3-4 किलोमीटर दूर से पानी लाने जाते हैं।
नगर निगम टैंकरों के जरिए पानी बांट रहा है, लेकिन कई इलाकों में टैंकरों की संख्या कम पड़ रही है और वितरण असमान है। नर्मदा पाइपलाइन वाले क्षेत्रों को अपेक्षाकृत बेहतर सप्लाई मिल रही है, जबकि बिना पाइपलाइन वाले इलाके ज्यादा परेशान हैं। गर्मी के चलते यशवंत सागर समेत कई जलाशयों का स्तर तेजी से गिर रहा है, जबकि बिलावली और लिम्बोड़ी झीलें सूख चुकी हैं।
प्रशासन की पहल
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए इंदौर जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। 30 जून 2026 तक नए निजी बोरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। निर्माण कार्यों, सर्विस स्टेशनों, गाड़ी धोने और बागवानी में नर्मदा या बोरिंग के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। अब केवल ट्रीटेड पानी का ही उपयोग अनिवार्य किया गया है। उल्लंघन पर 2000 रुपये तक जुर्माना या दो साल तक की जेल हो सकती है।
जनता की मुश्किलें
सुबह नौकरी या दुकान पर जाने से पहले लोगों को सबसे बड़ी चिंता साफ पानी की होती है। कई लोग वाहनों से पानी ढोते हुए दिख रहे हैं। गंदे पानी से पहले से ही स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा हुआ है—जनवरी 2026 में भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से डायरिया और उल्टी के प्रकोप में कई मौतें और सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंचे थे। अब गर्मी में पानी की कमी और गुणवत्ता दोनों चुनौती बनी हुई हैं।
नगर निगम का दावा है कि टैंकर सप्लाई बढ़ाई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बारिश न हुई तो मई-जून में स्थिति और बिगड़ सकती है। इंदौर जैसे शहर के लिए यह चेतावनी है कि स्वच्छता के साथ-साथ जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है। बोरिंग पर अत्यधिक निर्भरता, पुरानी पाइपलाइनों में रिसाव और बढ़ती आबादी सभी मुद्दे एक साथ सामने आ रहे हैं।

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