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19 मार्च से मां की कृपा : चैत्र नवरात्रि कल शुरू - INA NEWS

आयुषी उपाध्याय

नवरात्रि के नौ दिनों में 'मां दुर्गा' के नौ दिव्य रूपों (नवदुर्गा) की पूजा की जाती है। ये रूप देवी पार्वती के विभिन्न स्वरूपों से जुड़े हैं और प्रत्येक रूप जीवन के अलग-अलग गुण जैसे शक्ति, संयम, साहस, ज्ञान, भक्ति आदि का प्रतीक है।

 1. प्रथम दिन : मां शैलपुत्री  (पहला रूप)
     स्वरूप : पर्वतराज हिमालय की पुत्री। सफेद वस्त्र, हाथ में त्रिशूल और कमल, वाहन सफेद बैल।
     वर्णन : देवी सती के बाद पार्वती के रूप में हिमालय की बेटी के रूप में जन्म। शक्ति और स्थिरता की देवी।
     महत्व : मूल जड़ों से जुड़ाव, धैर्य, आत्मबल और स्थिरता प्रदान करती हैं। पूजा से मानसिक मजबूती मिलती है।
     संदेश : जीवन में मजबूत नींव रखें, प्रकृति से जुड़े रहें।

2.  दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा रूप)
     स्वरूप : श्वेत वस्त्र, हाथ में जपमाला और कमंडलु, तपस्या मुद्रा में।
     वर्णन : तप और साधना करने वाली अविवाहित रूप। भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया।
     महत्व : संयम, त्याग, अनुशासन और भक्ति की देवी। पूजा से मन की शुद्धि और लक्ष्य प्राप्ति होती है।
     संदेश : धैर्य और तप से हर मुश्किल आसान हो जाती है।

 3. तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा (तीसरा रूप)
     स्वरूप : माथे पर घंटे जैसा अर्धचंद्र, 10 हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र, सिंह पर सवार।
     वर्णन: विवाह के बाद शिव के साथ, माथे पर चंद्रमा धारण करने से नाम पड़ा।
     महत्व: शांति, साहस, न्याय और निर्भयता की देवी। दुष्टों का नाश करती हैं।
     संदेश : कठिनाइयों में भी शांत रहें, साहस बनाए रखें।

 4. चौथा दिन: मां कूष्मांडा (चौथा रूप)
    स्वरूप : आठ भुजाएं, सूर्य के समान तेज, सिंह पर सवार, विभिन्न हथियार।
     वर्णन : ब्रह्मांड की रचना करने वाली, सूर्यमंडल के केंद्र में निवास। उनकी किरणें सूर्य से भी तेज।
     महत्व : स्वास्थ्य, बुद्धि, ऊर्जा और समृद्धि की देवी। पूजा से रोग नाश और प्रकाश मिलता है।
     संदेश : सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं, ब्रह्मांड की रचनात्मक शक्ति को अपनाएं।

 5. पांचवां दिन: मां स्कंदमाता (पांचवां रूप)
    स्वरूप : चार भुजाएं, गोद में बाल स्कंद (कार्तिकेय), कमल पर विराजमान।
    वर्णन : कार्तिकेय की माता, मातृत्व और सुरक्षा का प्रतीक।
    महत्व : मातृत्व, प्रेम, सुरक्षा और विज्ञान की देवी। पूजा से संतान सुख और ज्ञान प्राप्ति।
    संदेश : मां बनकर सेवा और प्रेम का भाव रखें।

  6. छठा दिन: मां कात्यायनी (छठा रूप)
    स्वरूप : सुनहरे वस्त्र, 18 भुजाएं (कभी-कभी 4), सिंह पर सवार, विभिन्न हथियार।
    वर्णन : कात्यायन ऋषि की पुत्री के रूप में जन्म, महिषासुर का वध करने वाली।
    महत्व : साहस, शक्ति और न्याय की देवी। पूजा से भय मुक्ति और इच्छापूर्ति।
    संदेश : अन्याय के विरुद्ध खड़े हों, साहस दिखाएं।

 7. सातवां दिन: मां कालरात्रि (सातवां रूप)
    स्वरूप: काला रंग, लाल आंखें, चार भुजाएं, खड्ग और कटारी, गर्दन पर मुंडमाला।
    वर्णन : अंधकार नाश करने वाली, रात्रि की देवी, काल (मृत्यु) को भी नियंत्रित करती हैं।
    महत्व : भय, ग्रह दोष, शत्रु नाश और सुरक्षा की देवी। सबसे भयंकर रूप।
    संदेश : अंधकार (नकारात्मकता) को नष्ट कर प्रकाश लाएं।

8. आठवां दिन : मां महागौरी (आठवां रूप)
    स्वरूप : श्वेत वस्त्र, चार भुजाएं, शांत मुद्रा, वृषभ पर सवार।
    वर्णन : तप के बाद शिव से विवाह के बाद शुद्ध सफेद रूप।
   महत्व : शुद्धता, सौंदर्य, शांति और मोक्ष की देवी। पूजा से पाप नाश और सौभाग्य।
    संदेश : शुद्ध मन से जीवन जिएं, अहंकार त्यागें।

9. नवां दिन : मां सिद्धिदात्री (नौवां रूप)
    स्वरूप : कमल पर बैठी, चार भुजाएं, विभिन्न सिद्धियां प्रदान करती हुई।
    वर्णन : सभी सिद्धियों और मोक्ष की दाता, ब्रह्मांड की अंतिम शक्ति।
    महत्व  : सभी सिद्धियां, ज्ञान, समृद्धि और पूर्णता की देवी। पूजा से मनोकामना पूर्ति।
    संदेश : पूर्ण समर्पण से सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करें।

ये नौ रूप नवरात्रि की साधना में क्रमिक रूप से पूजे जाते हैं, जो आत्मा की यात्रा को दर्शाते हैं , ज्योतिषीय गणना के अनुसार  गुरुवार से  शुरू होने वाला  नवरात्र  मे  मां दुर्गा  'पालकी'  से धरती लोक पर  आएंगी ।  

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