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गाजियाबाद पीएनबी पर ठग गैंग का डाका

गाजियाबाद : गाजियाबाद पीएनबी घोटला के बाद अब लोन माफियाओं का गढ़ माने जाने बाले गाजियाबाद में 1 बैंक को एक सिंडिकेट के माध्यम से लूटा जाता रहा है कुछ ऐसा ही मामला है, सतीश गर्ग और राधे ट्रेडिंग कंपनी की जिसने पीएनबी चंदरनगर को 2 करोड़ 75 लाख रूपया चूना लगाता है.आपको बता दे इस लोन में भी लोन माफिया लक्ष्य तवंर का हाथ है, जो फिलहाल जेल में है.जिसका एक-एक साक्ष्य हमारे पास मौजूद है.

  • राधे ट्रेडिंग कंपनी ने लगाया 2 करोड़ 75 लाख का चूना
  • लोन के एवज में सतीश गर्ग ने मॉर्गेज करायी थी अपनी संपत्ति 
  • लोन खाता एनपीए होने के बाद बदला सतीश गर्ग का राग
  • संपत्ती कुर्क लोने होता देख थाने में दर्ज करायी एफआईआर
  • लोन माफिया लक्ष्य तवंर ने मिलकर लिखी बैंक को चूना लगाने का प्लान
मामला 2015 का है, पीएनबी बैंक के चंदरनगर ब्रांच द्वारा राधे ट्रेडिंग कंपनी जिसका मालिक विशाल गोयल है, को एक लोन दिया किया जाता है.2 करोड़ 75 लाख के लोन के एवज में जो संपत्ति मॉर्गेज की जाती है वो सतीश गर्ग की होती है.

बताया गया है कि लोन कराने के लिए लोन माफिया लक्ष्य तवंर ने सतीश गर्ग और राधे ट्रेडिंग कंपनी के मालिक विशाल गोयल के साथ मिलकर बैंक से लोन कराता है, 2015 से 2018 तक लोन खाता सुचारू रूप से चलता है... लेकिन 2018 के बाद खाता एनपीए होने की राह पर चल पड़ता है

जब खाता एनपीए होने की जानकारी सतीश गर्ग को चलती है तो वो खाता को एनपीए होने से बचाने और अपनी मॉर्गेज संपत्ति को कुर्क होने से बचाने के लिए, लोन खाते में 16 लाख रूपया जमा भी कराता है. जिससे साफ है कि सतीश गर्ग जिसकी संपत्ति के एवज में लोन किया गया था उसको लोन को लेकर एक-एक बात की जानकारी थी.

जब राधे ट्रेडिंग कंपनी के मालिक विशाल गोयल की तरफ से लोन का पैसा खाते में डलना बंद होता है, तो सतीश गर्ग 2018 में बैंक पंहुच कर बैंक से अपनी संपत्ति की गारंटी विड्राल करने की बात कहता है, जो बैंक की ओर से संभव नहीं था, साथ ही सतीश गर्ग यह दलील देता है कि लोन माफिया लक्ष्य तवंर और राधे ट्रेडिंग कंपनी के मालिक विशाल गोयल उससे 50 लाख रूपया लोन करने की बात कर बहला-फुसला कर कोरे कागज पर साइन करा लेता है... 

अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या सतीश गर्ग नाबालिग था जो उन्हें बहला-फुसला लिया जाता है...साथ ही ये भी कि अगर सतीश गर्ग को जानकारी नहीं थी की 2 करोड़ 75 लाख का लोन हुआ है, तो फिर वो खाते को एनपीए होने और संपत्ति को कुर्क होने से बचाने के लिए 16 लाख रूपया लोन खाते में कैसे जमा कराते हैं...इससे साफ होता है कि सतीश गर्ग भी इस लोन घोटाले में राजदार है.

बैंक की तरफ किसी तरह की राहत नहीं मिलता देख, और अपनी संपत्ति को कुर्की की कगार पर पहुंचता देख सतीश गर्ग थाने में एफआईआर दर्ज कराता है. 2018 में लोन खाता खराब होता है. जिसकी शिकायत करने और खुद को निर्दोश बताने के लिए 2 साल बाद 2020 में एफआईआर दर्ज कराया जाता है. 

जब लोन किया गया था उस वक्त बैंक मैनेजर रामनाथ मिश्रा थे. और लोन मैनेजर तारीख़ हसन थे. रामनाथ मिश्रा अभी जेल में हैं और जिन्हें कई लोन घोटाले में नामजद किया गया है. और बैंक ने उन्हें रिमूव कर दिया है.लोन खाता को एनपीए होता देख तत्कालिन मैनेजर अणुपम सहाय जिसने पहल की और नोटिस भेजा उनका नाम भी एफआईआर में डाला गया है. साथ कई अन्य मैनेजरों के नाम पर भी एफआईआर दर्ज कराया जाता है.

लोन माफिया ने ऐसे ही कई अलग-अलग तरीके से बैंक को लूटता रहा है. यह मामला भी लक्ष्य तवंर और सुखपाल केस जैसा है. जिसमें एक गैंग काम करता है, एक सिंडिकेट चलाया जा रहा है. जिसकी जांच एसआईटी कर रही है... लेकिन क्या इस 2 करोड़ 75 लाख के लोन घोटाले में सतीश गर्ग भी राजदार है... क्या ये संभव है कि विशाल गोयल को लोन दिलाने के लिए सतीश गर्ग ने बिना किसी लालच के अपनी संपत्ति मॉर्गेज करा दी हो..और अब जब संपत्ति कुर्क होने के कगार पर है तो खुद को बेचारे बताने में लग गए हैं... 

सबसे बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या गैंगस्तर एक्ट किसके उपर लगना चाहिए इस सिंडिकेट के उपर या फिर बैंककर्मियों के उपर, हलाकि एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है

INA NEWS DESK 

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