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आज है बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा - INA NEWS TV

  • उदय सिंह यादव, प्रधान संपादक - INA NEWS TV

Dussehra 2021: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा आज 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार दशहरा या विजयादशमी का त्योहार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। 

इस वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 15 अक्टूबर को है। दशहरा के दिन लंका के राजा रावण, भाई कुंभकर्ण एवं पुत्र मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। देशभर में होने वाली रामलीलाओं का अंतिम दिन भी दशहरा को ही होता है। पुतला दहन के साथ रामलीलाओं का समापन होता है। 

बंगाल, बिहार समेत देश के कई राज्यों में दुर्गा पूजा का भी समापन विजयादशमी के दिन होता है, हालांकि मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन मुहूर्त पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं कि दशहरा पर विजयादशमी पूजा एवं शस्त्र पूजा का मुहूर्त और इसका महत्व क्या है।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी का प्रारंभ 14 अक्टूबर को शाम 06:52 बजे से हो हुआ है, जो आज 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को शाम 06:02 बजे तक है। ऐसे में दशहरा या विजयादशमी का पावन पर्व आज 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

विजयादशमी 2021 पूजा मुहूर्त

इस वर्ष विजयादशमी का पावन पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग और रवियोग में है। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 06:22 बजे से सुबह 09:16 बजे तक और रवि योग पूरे दिन है। ऐसे में आप विजयादशमी की पूजा सर्वार्थ सिद्धि योग में करें तो उत्तम है। हालांकि दशहरा को अभिजित मुहूर्त दिन में 11:44 से दोपहर 12:30 बजे तक है। 

इसमें भी आप पूजा कर सकते हैं। लेकिन सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा अच्छा रहेगा। विजयादशमी के दिन देवी अपराजिता की पूजा होती है।

विजयादशमी 2021 शस्त्र पूजा मुहूर्त

अपने देश में विजयादशमी के पावन पर्व पर शस्त्र पूजा की भी परंपरा है। इस वर्ष विजयादशमी पर शत्र पूजा के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 02:02 बजे से दपेहर 02:48 बजे तक है। इस मुहूर्त में आप शस्त्र पूजा कर सकते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग में भी कर सकते हैं।

दशहरा का महत्व

भगवान श्रीराम ने अपनी पत्नी सीता का हरण करने वाले लंका के राजा रावण का वध आश्विन शुक्ल दशमी को किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार भीषण युद्ध के बाद दशमी को रावण का वध हुआ और श्रीराम ने लंका विजय प्राप्त की, इसलिए इस दिन को विजयादशमी या दशहरा के रुप में मनाया जाता है। 

वहीं, मां दुर्गा ने महिषासुर के साथ 10 दिनों तक भीषण संग्राम किया और आश्विन शुक्ल दशमी को उसका वध कर दिया। इस वजह से भी उस दिन को विजयादशमी के रुप में मनाया जाने लगा। ये दोनों ही घटनाएं बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक हैं।

शहरा का मतलब होता है दसवीं तिथी

दशहरा का मतलब होता है दसवीं तिथी। पूरे साल में तीन सबसे शुभ घड़ियां होती हैं, एक है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, दूसरी है कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा और तीसरा है दशहरा। इस दिन कोई भी नया काम शुरू किया जाता है और उसमें अवश्य ही विजय मिलती है। दशहरे के दिन नकारात्मक शक्तियां खत्म होकर आसामान में नई ऊर्जा भर जाती है। जीवन में सकरात्मकता का संचार होता है। 

दशहरा पूजा विधि

- सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें
-आंगन में गोबर के गोल बर्तन जैसे बनाएं।
-इनको श्रीराम समेत अनुजों की छवि मानें।
-इन चार बर्तनों में गीला धान और चांदी रखें।
- बर्तनों को कपड़े से ढंक दें।
- धूप, दीप, ज्योत, फूलों से उनकी पूजा करें
- सच्चे मन से भगवान का ध्यान करें
- पूजा के बाद ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं
- सबसे बाद खुद भोजन करें

रावण का पुतला

दशहरे का धार्मिक महत्व तो है ही, लेकिन इसको लेकर बच्चों और युवाओं में खासी उत्सुकता रहती है। सबसे पहले तो दशहरे के साथ दीवाली की आहट भी शुरू हो जाती है और बच्चों को पटाखे, रोशनी चलाने का मौका मिल जाता है। दूसरा होता है पुतला बनाना। रावण का पुतला लगभग देश के हर हिस्से में, हर गली में और हर चौराहे पर लगाया जाता है। शाम को सब लोग इकट्ठा होते हैं, कोई एक शख्स राम बनता है और पुतले को आग लगा देता है। लोग तालियां मारते हैं और जबरदस्त आतिशबाजी की जाती है। मेले लगते हैं, मिठाई खरीदी जाती है। 

रावण के छोटे छोटे पुतले तो बच्चे खुद ही बना लेते हैं, लेकिन बड़े बड़े पुतले बनाने का काम कई महीने पहले ही शुरू हो जाता है। हजारों से लाखों कि कीमत के ये पुतले कई फुट ऊंचे बनाए जाते हैं। देश में सबसे बड़ा रावण अंबाला के बराड़ा में बनाया जाता है। वहीं और जगह पर रावण को नाम दे दिये जाते हैं, जैसे आतंकवाद का रावण, पॉल्यूशन का रावण आदि। दशहरा एक त्योहार तो है ही साथ ही में हजारों लोगों के रोजगार का साधन भी है। 

सबसे अलग दशहरा

कुल्लू (हिमाचल प्रदेश)

कुल्लू में शायद ही ऐसा कोई और त्योहार मनाया जाता होगा, जिनती भव्यता से दशहरा मनाया जाता है। कुल्लू के धालपुर मैदान में सात दिन तक दशहरे का त्योहार चलता है। यहां दूर दूर से लोग मेला दखने आते हैं। स्थानीय देवी देवता भी मेले में शिरकत करते हैं। कुल देवताओं को पालकी में बैठाकर यात्राएं निकाली जाती हैं।

मैसूर का दशहरा

कर्नाटक के मैसूर में भी दशहरा काफी धूम धाम से मनाया जाता है। रंग बिरंगे शहर में बड़े बड़े हाथियों को सजाया जाता है और फिर झांकियां निकाली जाती हैं। चामुंडेश्वरी मंदिर में पूजा अर्चना कर ये कार्यक्रम शुरू किए जाते हैं। 

दिल्ली का दशहरा

दिल्ली के दशहरे का एक अलग ही रूप है। यहां दशहरे के दिन बड़े बड़े पुतले बनाए जाते हैं और उन्हें प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक आग लगाते हैं। दिल्ली में रामलीला मैदान और सुभाष पार्क में बड़े पुतले जलाए जाते हैं। 

अंबाला के बराड़ा का दशहरा

अंबाला के बराड़ा में अब तक का सबसे ऊंचा रावण का पुतला दहन होता रहा है। बराड़ा का रावण पांच बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है । पिछले साल रावण का पुतला 210 फुट का था जो कि देश में सबसे ऊंचा था।

लखनऊ का दशहरा

लखनऊ के दशहरे का एक अलग ही रूप है। यहां दशहरे के दिन बड़े बड़े पुतले बनाए जाते हैं और उन्हें आग लगाते हैं। लखनऊ में रामलीला मैदान में बड़े पुतले जलाए जाते हैं। 

बुराई पर अच्छाई की विजय के पर्व विजयदशमी की आपको परिवार सहित आत्मीय शुभकामनायें

इस अवसर पर हम सब मिलकर भी अपनी अपनी बुराइयों को छोड़ते हुए सकारात्मक रचनात्मक और सहयोगात्मक कार्यों में अपने आप को व्यस्त रखें, ईश्वर से प्रार्थना है कि वह वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, आदर्श, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आपके जीवन में अनेकानेक सफलताएँ एवं अपार खुशियाँ लेकर आए।

 INA NEWS DESK 


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