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मकर संक्रांती क्यों मनाते है, जाने कुछ पौराणिक रोचक तथ्य

उदय सिंह यादव : प्रधान संपादक - INA NEWS 

DESK : भारत एकमात्र ऐसा देश है की जहाँ पर विभिन्न तरह के त्यौहार मनाये जाते है | यहाँ पर हर त्यौहार का एक अलग ही महत्व होता है और अलग ही रीति रिवाज होता है | पूरी दुनिया में  हमारे भारत जैसा कोई और देश है ही नहीं , जहा पर विभिन्न तरह के लोग और उनके अलग संस्कृति, धर्म रहते हो। तो चलिए जानते है मकर संक्रांती के बारे में कुछ तथ्य |

मकर संक्रांती के बारे में रोचक तथ्य 

मकर संक्रांती हिन्दुओ का प्रसिद्ध त्यौहार है | यह भारत के कई हिस्सों में और भी कुछ अन्य भागो में मनाया जाता है | हम सब जानते है की, मकर संक्रांती हर साल जनवरी में आता है | मकर संक्रांती का त्यौहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है, पर कभी-कभी ये त्यौहार 15 जनवरी को भी आता है | कभी कभी पृथ्वी के गति और स्थितियों के कारन ये त्यौहार एक दिन आगे या पीछे हो जाता है | 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस त्यौहार को मनाया जाता है। इस त्यौहार के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांती कहते है | क्योंकि सूर्य मकर राशी में प्रवेश करता है इसलिए इसे मकर संक्रांती कहते है |

इस दिन मकर संक्रांति उत्सव के रूप में दान किया जाता है | पतंग उडाये जाते है | तिल और गुड के पकवान बाते जाते है | मकर संक्रांती का त्यौहार सब लोग बड़े ही ख़ुशी के साथ मानते है | पर जादातर लोग इस त्यौहार के बारे में कुछ नहीं जानते | 

मकर संक्रांती के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारंभ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। सूर्य जैसे ही उत्तर दिशा की और बढ़ने लगता है वैसे दिन की लम्बाई बड़ी और रात की लम्बाई छोटी होने लगती है | हमारे भारत में इस दिन से बसंत के ऋतु की शुरुवात भी मानी जाती है | 

इस कारण मकर संक्रांती को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है | 

पुराणों के अनुसार मकर संक्रांती  के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए जाते हैं, क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है। एक अन्य पुराण के अनुसार गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांती  पर गंगा सागर में मेला लगता है।
  • सूर्यदेव की आराधना के महापर्व मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें ।।  -  उदय सिंह यादव : प्रधान संपादक - INA NEWS

मकर संक्रांती के त्यौहार को अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। छत्तीसगढ़, गोवा, ओड़िसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्रप्रदेश,  तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश,  महाराष्ट्र, मणिपुर,राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू में इस त्यौहार को मकर संक्रांती के नाम से जाना जाता है | 
मकर संक्रान्ति को तमिलनाडु में 'पोंगल' के रूप में जाना जाता है | कर्णाटक में इसे मकर सक्रमण के नाम से जाना जाता है | पंजाब में इसे लोग लोहड़ी के नाम से भी जानते है | और साथ ही साथ उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में इसे खिचड़ी नाम से भी जाना जाता है | इस त्यौहार विभिन्न जगहों पर कई विभिन्न नाम से जाना जाता है |

क्या आप जानते है की आखिर लोग संक्रांति के दिन पतंग क्यों उड़ाते है? क्या ये कोई रिवाज है या बस मनोरंज का एक जरिया है?... 

असल बात तो ये है की ठण्ड के दिनों में हमारे शरीर की सूर्य से ऊर्जा नही मिल पाती कई सरे रोग हमे घेर लेते है बस उन रोगों से मुक्ति पाने के लिए सुबह सूर्य की मौजूदगी में सूर्य की किरणों को शरीर से स्पर्श करने के लिए सभी लोग पतंग उड़ाते है।, मकर संक्रांती का त्यौहार सुख और समृद्धि के प्रतिक माना जाता है |

14 जनवरी को मकर संक्राती के पावन पर्व पर आप सभी को  हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ।।

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