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मुंबई हमले की 10वी बरसी पर विशेष! तो क्या कुछ पुलिसकर्मी चाहते थे कि हमला करके सुरक्षित चले जाएं कसाब के साथी?

मुंबई: ‘‘रेलवे स्टेशन पर तैनात पुलिसकर्मियों ने स्टेशन पर ही कसाब और अन्य आतंकवादी को मार दिया होता तो कई जानों को बचाया जा सकता था’’ ये बातें हम नहीं कह रहे हैं ये बातें 'सेबी' ने पीटीआई भाषा से कहीं हैं. संवाद बेशक एक लाइन का हो लेकिन मुंबई हमले की 10वीं बरसी पर इस संवाद के मायने बहुत बड़े हैं




सेबी उर्फ डिसूजा वही व्यक्ति हैं जिन्होंने मुंबई हमलों के एकमात्र जिन्दा पकड़े गए आतंकी कसाब की सबसे करीब से तस्वीर ली थी और यहीं तस्वीर कसाब के ताबूत में सबसे मजबूत कील साबित हुई जिसके सहारे कसाब 21 नवम्बर 2012 को फाँसी पर लटका.



आज के ही दिन 10 वर्ष पहले मुंबई में आतंकियों का तांडव देखने को मिला था भारी हथियारों से लैस 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में जो तबाही मचाई आज भी उसको याद कर लोगों की आँखों में आँसू आ जाते हैं देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में आतंकियों ने ऐसा मौत का खेल खेला कि जो उनकी बन्दूक के आगे आता गया वो इस दुनिया को अलविदा कहता गया और इस तरह कुल 166 लोगों ने इस हमलें में अपनी जान गवांई और 300 से ज़्यादा लोग जख़्मी हो गए.


                                    (CST की दीवार पर गोलियों के निशान)

रेलवे स्टेशन पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कसाब और उसके साथी को भागने दिया ये सनसनीखेज आरोप मुंबई में 10 साल पहले हुए आतंकी हमले के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर आतंकवादी अजमल कसाब की करीब से तस्वीर लेने वाले फोटो पत्रकार का है. 26 नवंबर 2008 की रात को जब आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया तो गोलीबारी की आवाज सुनकर सेबेस्टियन डिसूजा रेलवे स्टेशन के नजदीक अपने दफ्तर से अपना कैमरा और लेंस लेकर निकल पड़े.

डिसूजा ने बताया कि, ‘‘ मैं प्लेटफॉर्म पर मौजूद ट्रेन के एक डिब्बे में दौड़ कर गया और फोटो लेने की कोशिश की, लेकिन मुझे अच्छा एंगल नहीं मिला तो दूसरे डिब्बे में गया और आतंकवादियों के आने का इंतजार किया. मेरे पास कुछ फोटो लेने के लिए थोड़ा ही वक्त था. मेरे ख्याल से उन्होंने मुझे फोटो लेते हुए देख भी लिया था, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया.’’ 

हालाँकि कई वेबसाइट मुंबई हमलों को लेकर अलग अलग तरह के दावे कती हैं कुछ डिसूजा के फ़ोटो की सत्यता पर भी सवाल उठाती हैं लेकिन मुंबई हमला एक बहुत भयावह सच है जिसका कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में नहीं देखना चाहेगा.

गोवा में बस गए डिसूजा का आरोप है, ‘‘ रेलवे स्टेशन के नजदीक पुलिस की दो बटालियनें मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.’’ एके-47 राइफल थामे कसाब की नजदीक से फोटो खीचने के लिए सेबी (67) को वर्ल्ड प्रेस फोटो पुरस्कार भी मिला.

हालांकि मुंबई हमलों का अन्तिम ज्ञात सत्य यही है कि लोगों की जान बचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने और सुरक्षाबलों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी. 



INA न्यूज़ सभी शहीदों को शत शत नमन करता है
(सभी चित्रः साभार)

INA न्यूज़ के लिए शिव चौधरी 

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