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दक्षिणी ध्रुव पर ओजोन परत में उभरा अंटार्कटिक महाद्वीप के बराबर का छेद, जानें वैज्ञानिक क्यों बता रहे खतरा?

दक्षिणी ध्रुव के ऊपर हर साल बनने वाला ओजोन परत का छेद इस साल सबसे बड़ा है। यूरोपियन यूनियन के कॉपरनिकस वायुमंडल निगरानी सेवा ने इसकी जानकारी दी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब ओजोन परत का यह छेद अंटार्कटिक महाद्वीप के बराबर है। आमतौर पर  दक्षिणी गोलार्द्ध में हर साल अगस्त से अक्टूबर के दौरान उभरने वाला यह छेद सितंबर के मध्य में सबसे बड़े क्षेत्र में होता है। लेकिन इस बार ओजोन परत में छेद इतना बड़ा है कि इसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। 

कॉपरनिकस के मुताबिक, पिछले हफ्ते लगातार बढ़ने के बाद अब ओजोन परत का यह छेद 1979 के बाद से उभरे 75 फीसदी ओजोन छेदों से बड़ा है। फिलहाल इसका क्षेत्रफल अंटार्कटिक से भी ज्यादा हो गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले साल भी ओजोन परत का यह छेद सितंबर में ही अप्रत्याशित रूप से बड़ा हो गया था। तब क्षेत्रफल में तो यह आज के छेद से छोटा था, लेकिन अब तक के रिकॉर्ड में ओजोन परत का यह छेद सबसे लंबे समय तक महाद्वीप के ऊपर बने रहने वाला दर्ज हुआ।  ओजोन परत पृथ्वी से करीब 9 से 22 मील (15-35 किमी) ऊपर मौजूद है और यह धरती को सूरज से निकलने वाली घातक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाती है। दक्षिणी गोलार्द्ध के ऊपर होन वाला यह छेद मुख्यतः क्लोरीन और ब्रोमीन जैसे केमिकल्स के कारण होता है, जो कि सर्दियों के दौरान ऊपर समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) तक पहुंच जाते हैं। इससे अंटार्कटिक में सर्दी के दौरान ओजोन परत का नष्ट होना जारी रहता है। कुछ स्थानों पर कुल ओजोन में दो तिहाई की कमी होती है। इस गंभीर कमी के कारण ओजोन छेद बनाता है।


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