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मानव निर्मित नहीं कोरोना - यूएस इंटेलिजेंस

DESK : कोरोना को लेकर चीन और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी तनातनी के बीच एक नया मोड़ आया है। यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी (यूएसआईसी) ने एक तरह से चीन को क्लीन चिट दे दी है। बृहस्पतिवार को कहा कि जानलेवा कोरोना ‘मानव निर्मित’ नहीं है। 

कम्युनिटी ने यह भी कहा है कि उपलब्ध सुबूतों और वैज्ञानिक सहमतियों के हिसाब से कोविड-19 वायरस किसी लैब में जेनेटिक मॉडिफिकेशन (सामान्य कोरोना वायरस की जीन्स में कृत्रिम बदलाव) के जरिये भी नहीं बनाया गया है। दरअसल, अभी तक ट्रंप चीन पर आरोप लगाते रहे हैं कि कोरोना वायरस को चीन स्थित वुहान के लैब में बनाया गया है। जबकि चीन इससे इनकार करता रहा है। हालांकि, कम्युनिटी ने यह भी कहा कि वे इसकी कड़ी जांच जारी रखेंगे कि कोविड-19 वायरस का फैलाव किसी संक्रमित जानवर के इंसानी संपर्क में आने से हुआ या यह चीन में एक लैब में दुर्घटना के कारण फैलना चालू हुआ।

बता दें कि अमेरिका लगातार वायरस को लेकर चीन पर आरोप लगा रहा है। ट्रंप सार्वजनिक रूप से 'अदृश्य शत्रु' के वैश्विक प्रसार को लेकर चीन को लगातार जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और उन्होंने इसके खिलाफ जांच शुरू कर दी है। उनका कहना है कि अमेरिका महामारी से हुए नुकसान को लेकर चीन से जर्मनी के मुकाबले ज्यादा मुआवजा लेगा।

जर्मनी ने चीन से 12.41 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं का मानना है कि यदि चीन ने पारदर्शिता बरती होती और वायरस के शुरुआती चरणों में इसकी जानकारी साझा की होती तो इतने सारे लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था के विनाश से बचा जा सकता था। कई और देश चीन से उन्हें पहुंचे नुकसान को लेकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

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