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सीएम योगी व केंद्रीय मंत्री पुरी ने दिखाई एक्वा लाइन मेट्रो को हरी झंडी

ग्रेटर नोएडा : मेट्रो की बहुप्रतीक्षित एक्वा लाइन (Aqua line Metro) का आज उद्घाटन हो गया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ(Yogi adityanath) केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने नोएडा सेक्टर-137 मेट्रो स्टेशन से नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (Noida Metro Rail Corporation) की एक्वा लाइन मेट्रो को हरी झंडी दिखाई। दोनों ने संयुक्त रूप से नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो का उद्घाटन किया।

साथ ही, ग्रेटर नोएडा के ग्रेनो डिपो स्टेशन पर नोएडा की छह परियोजनाओं का लोकार्पण और तीन का शिलान्यास भी करेंगे। मेट्रो के उद्घाटन के बाद योगी सेक्टर-137 मेट्रो स्टेशन से 20 मिनट के मेट्रो का सफर तय करने के बाद ग्रेनो डिपो मेट्रो स्टेशन पहुंचेंगे। यहां वह नोएडा की छह परियोजनाओं यमुना पर नया पुल, सेक्टर-33 शिल्पहाट, सेक्टर-108 ट्रैफिक पार्क, सेक्टर-94 कमांड कंट्रोल सेंटर, शाहदरा ड्रेन पर पुलों का चौड़ीकरण और सेक्टर-62 के मातृ एवं बाल सदन का लोकार्पण करेंगे।

इसके अलावा योगी नोएडा में सेक्टर-14ए चिल्ला रेगुलेटर से एमपी-3 रोड पर महामाया फ्लाईओवर तक बनने वाले एलिवेटेड रोड, डीएससी रोड पर अगाहपुर से स्पेशल इकोनोमिक जोन (एसीईजेड) तक बनने वाले एलिवेटेड रोड और सेक्टर-51, 52, 71 एवं 72 चौराहे पर अंडरपास का शिलान्यास करेंगे।

नोएडा-ग्रेनो मेट्रो कॉरिडोर पर पहले चरण में 11 ट्रेनें चलेंगी। वहीं, इस कॉरिडोर पर 19 ट्रेनें चलाने की योजना है। भले इस प्रोजेक्ट का कुल बजट 5500 करोड़ रुपये है लेकिन यह काफी सस्ती मेट्रो लाइन है। जहां बाकी मेट्रो लाइनों के निर्माण में प्रति किलोमीटर 170 से 180 करोड़ रुपए का खर्च आता है, वहीं नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो पर सिर्फ 150 से 160 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर खर्च हुए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक यहां 11 ट्रेनें चीन से आई हैं। इस कॉरिडोर पर 21 स्टेशन हैं, जिनमें 18 स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा एक्वा लाइन के यात्रियों के लिए स्मार्ट कार्ड की भी व्यवस्था है। इस कार्ड का उपयोग दूसरे अन्य कार्यों के लिए भी किया जा रहा है।

बता दें कि इस लाइन का बजट बढ़ सकता था, लेकिन इंजीनियरों ने मेट्रो पिलर की ऊंचाई कम रखी और आबादी कम होने की वजह से इस लाइन का खर्च कम आया।  सफीपुर गांव के पास मेट्रो ट्रैक की ऊंचाई करीब-करीब जमीन के बराबर है। गांव के समीप से 400 केवी की हाइटेंशन लाइन क्रास कर रही है। मेट्रो की ऊंचाई बढ़ने से लाइन को स्थानांतरित करना पड़ता है। इंजीनियरों ने अपने कौशल से यहां ट्रैक की ऊंचाई कम की। इससे एनएमआरसी को 120 करोड़ रुपये की बचत हुई।

इस लाइन पर प्रिंटेड टिकटें मिलेंगी। यहां टोकन की व्यवस्था नहीं होगी। इसका पहला ट्रायल डिपो स्टेशन से नॉलेज पार्क तक बीते वर्ष अक्तूबर-नवंबर में किया गया था। इस कॉरिडोर के सभी स्टेशनों में प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर, जल संचय की सुविधा और सोलर पैनल होंगे। इस कॉरिडोर को डीएमआरसी के ब्लू लाइन के सिटी सेंटर से सेक्टर-62 कॉरिडोर से वॉक वे जोड़ा जाएगा।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा डिपो

26 हेक्टेयर में फैले डिपो में 16 लाइनें हैं, जहां 32 ट्रेनें खड़ी हो सकेंगी। यहां 4 ट्रैक का वर्कशॉप हैं। एक ट्रैक पर क्लीनिंग शेड, छह ट्रैक निरीक्षण के लिए और एक किलोमीटर का टेस्टिंग ट्रैक है। पूरी लाइन यहीं से कंट्रोल होगी।

फैक्ट फाइल

29.7 किलोमीटर लंबी लाइन, 21 स्टेशन, अक्तूबर 2014 में एमओयू साइन, 2002 यू-गर्डर्स, स्टील 75000 टन, कंक्रीट 5.5 लाख क्यूबिक मीटर।

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