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बरसती लाठियों और बहते खून के बीच नारे लगाता रहा ये क्रांतिकारी

देश के महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय भारत का जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के मोगा जिले में हुआ था। वे पंजाब केसरी (पंजाब का शेर) के नाम से पहचाने जाते थे। लालाजी ने जलियाँवाला बाग नरसंहार के विरुद्ध पंजाब में विरोध प्रदर्शन और असहयोग आंदोलन का नेतृत्व किया। इस दौरान वे कई बार गिरफ्तार भी किए गए।  

1929 में जब साइमन कमीशन भारत आया तो पूरे भारत में इसका सख्त विरोध किया गया। लालाजी ने खुद साइमन कमीशन के विरुद्ध एक जुलूस निकाला। ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन रोकने के लिए बेरहमी से जुलूस पर लाठी चार्ज करवाया, जिससे लालाजी के सिर पर गंभीर चोटें आईं और इसी वजह से 17 नवंबर 1928 में उनका निधन हो गया। आज उनकी जयंती पर हम आपके लिए लाए हैं, उनके पांच ऐसे विचार जो आपको प्रेरणा देते रहेंगे। 

1. पराजय और असफलता कभी-कभी विजय की ओर बढ़ने के लिए अनिवार्य कदम होते हैं।

2. अतीत पर गर्व करना तब तक निरर्थक है, जब तक उसकी प्रेरणा से भविष्य का निर्माण न किया जाए।

3. देशभक्ति का निर्माण हमेशा इंसाफ और सत्य की दृढ़ चट्टान पर ही हो सकता है।

4. इंसान को सत्य की राह पर चलते हुए बिना फायदे की चिंता किए बहादुर और ईमानदार होना चाहिए।

5. हिंदू धर्म में नारी दुर्गा और सरस्वती का प्रतिरूप हैं, अर्थात नारी ही सबका आधार हैं, जो सुंदर भी हैं और शक्ति का रूप भी हैं।

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