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पकड़ में आएंगे फेक ऑनलाइन रिव्यू

DESK - वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता(एआइ)) प्रणाली विकसित करने में सफलता हासिल की है, जिसके जरिये ऑनलाइन ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर मशीन द्वारा लिखे गए फेक रिव्यू (फर्जी समीक्षा) को पकड़ा जा सकेगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि ट्रिपएडवाइजर, येल्प और अमेजन जैसी वेबसाइट्स का प्रयोग करते समय 10 में से नौ लोग इन रिव्यू को पढ़ते हैं। हालांकि ये सभी सही नहीं होते हैं। इन साइट्स पर इंसानों द्वारा फेक रिव्यू लिखा जाना एक सामान्य बात है, लेकिन अब तेजी से मशीनों द्वारा भी यह काम कराया जा रहा है।

अमेरिका स्थित आल्टो यूनिवर्सिटी में डॉक्टरेट के छात्र मिका जुउति कहते हैं, आजकल एल्गोरिद्मस पर आधारित फेक रिव्यू तैयार करना आसान और सटीक हो गया है। ज्यादातर मामलों में सही और फेक रिव्यू में अंतर करना मुश्किल होता है। मिका के मुताबिक, कई कंपनियां अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए इनके जरिये अपने ब्रांड की अच्छी इमेज बनाती हैं, वहीं कुछ इनकी मदद से अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की साइट्स पर बुरे रिव्यू लिखवाती हैं। बकौल मिका, पूरा खेल पैसों का है। यात्रा स्थलों, होटल, सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ता उत्पादों के लिए ऑनलाइन रिव्यू आज एक बड़ा बिजनेस बन गया है।

ये तकनीक की तैयार

रिव्यू तैयार करने वालों को निशाने पर लाने में मदद करने के लिए मिका और उनकी टीम ने एक तकनीक का प्रयोग किया। इसे न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन नाम दिया। इसके जरिये शोधकर्ताओं ने मॉडल को विषय की समझ दी। इसमें रिव्यू रेटिंग, रेस्तरां का नाम, शहर, राज्य और फूड टैग्स का प्रयोग कर विश्वसनीय परिणाम सामने आए। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके जरिये असली और फर्जी रिव्यू को अलग-अलग किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने बताया था तरीका

वर्ष 2017 में अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के शोधकर्ताओं ने एक मशीन को प्रशिक्षित करने वाले मॉडल के बारे में दिखाया था। इसमें एक डीप न्यूरल नेटवर्क के लिए येल्प पर मौजूद 30 लाख रेस्तरां की रेटिंग के डाटा का प्रयोग किया गया। शोधकर्ताओं ने दिखाया कि कैसे मशीन को प्रशिक्षण देने के बाद अक्षर-दर-अक्षर फेक रिव्यू लिखवाया जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ त्रुटियां थीं, जिसे पढ़ने वाले आसानी से पकड़ सकते थे। जैसे कि यह मशीन जब लास वेगास स्थित किसी जापानी रेस्तरां का रिव्यू लिखती तो उसके लिए बाल्टीमोर के इतालवी रेस्तरां का हवाला लेती। इन्हें आसानी से पकड़ा जा सकता था। इसी से शोधकर्ताओं को इससे निपटने का रास्ता सूझा।

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