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विश्व

पाकिस्तान में हिन्दू भेदभाव के हो रहें है शिकार

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नई दिल्ली  –  पाकिस्तान में लाखों लोग सार्वजनिक जीवन में रोज़ाना अपनी धार्मिक पहचान के कारण भेदभाव का सामना करते हैं.

पाकिस्तानी हिंदू वर्षा अरोड़ा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मॉडर्न लैंग्वेज में मीडिया की छात्रा हैं.

सार्वजनिक स्थानों पर हिंदू महिलाओं के साथ व्यवहार के बारे में वो कहती हैं, “जब लोगों को मेरी धार्मिक पहचान के बारे में पता चलता है, तो कुछ लोग जानना चाहते हैं कि वो कब भारत से पाकिस्तान आ गईं? ऐसे समय मुझे कहना पड़ता है कि हम तो शुरू से यहीं रहते आए हैं.”

लोग अक्सर सवाल पूछते हैं कि यदि आप शुरुआत से ही पाकिस्तान में रह रहे हैं तो आपको कभी धर्म बदलने का ख्याल नहीं आया?

उजाला हयात नेशनल ऑर्ट्स कॉलेज में ललित कला की छात्रा हैं. कुछ समय पहले, एक असाइनमेंट के सिलसिले में उन्हें सार्वजनिक परिवहन में बिंदी लगाकर यात्रा करनी थी, ताकि हिंदुओं के बारे में लोगों के विचार जाने जा सकें.

वो बताती हैं, “यात्रा के दौरान लोगों का पूरा ध्यान मेरे माथे पर लगी लाल बिंदी पर ही टिकी रही. हर व्यक्ति सवालिया निगाहों से देख रहा था, जैसे पूछना चाह रहा हो कि आप यहाँ क्या कर रही हैं?”

उजाला ने कहा, “बहुत से लोग हमसे बात करना चाह रहे थे. हम दो लड़कियों के बीच में बैठी एक बुर्के वाली आंटी ने सीधे मुझसे तो नहीं, लेकिन मेरे साथ बैठी लड़की से कहा, “देखो, मेट्रो में किस तरह बिंदी लगाकर घूम रही है. आपको उस संस्कृति में ढल जाना चाहिए जहां आप रहते हैं.”

अपने इसी अनुभव पर वो कहती हैं, “जब पश्चिमी देशों में हमसे ये कहा जाता है तो हमें कितना बुरा लगता है कि ये हमारी संस्कृति है ये हमारा धर्म है, हमें इसे स्वीकार करना चाहिए.”

वर्षा मीडिया में अपना करियर बनाना चाहती हैं और वो बहुत खुल कर बात करती हैं, लेकिन अफ़सोस होता है कि धार्मिक पहचान ज़ाहिर होते ही बातचीत का विषय सीमित हो जाएगा.

जब बात शुरू होती है तो सामान्य मुद्दों की बजाय हिंदू, मुस्लिम, ईसाई धर्म, भारत और पाकिस्तान के इर्द-गिर्द घूमने लगती है.

वर्षा और उजाला ने अपने अनुभवों को बताया कि कभी-कभी सार्वजनिक परिवहन में लोगों ने अपनी सीटें बदल दीं.

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INA NEWS

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